Snack's 1967



कबीर साहेब की काल से वार्ता


कबीर साहेब चारोँ युगोँ मेँ आते


देवी - देवताओँ को अंजान पूजा करते है


श्राद्व निकालने ( पितर पूजने ) वाले पितर बनेँगे , मुक्ति नहीँ The Sradv remove or ancestor worship


पवित्र चारोँ वेदोँ अनुसार साधना का परिणाम केवल स्वर्ग-महास्वर्ग प्राप्ति , मुक्ति नही ( Not free , only receipt heven-mahaswarg result of sadhana according to four vegas)


ब्रह्म का साधक ब्रह्म को तथा पूर्ण ब्रह्म का साधक पूर्ण ब्रह्म को प्राप्त होते हैँ (also receipt of purnbraham of Perfective of purnbrahama and receipt brahama of Perfective of brahama.)


दीक्षा लेनेवाले व्यक्तियोँ के लिए आवश्यक जानकारी (Information required for the initiation collector persons)

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अध्यात्म क्या है ?


काल और पूर्णब्रह्म मेँ वार्त्तलाप


विचार बिँदु


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