ब्रह्मचर्य शब्द बड़ा प्यारा है , बड़ा अद्भुत है । इस शब्द मेँ बड़ा राज है , बड़ा रहस्य है ।
अधिक पढ़ेँ >>>
ब्रह्मचर्य मूलत: संस्कृत भाषा का शब्द है और व्याकरण के अनुसार जब उसका विश्लेषण करते हैँ , तब दो शब्द हमारे सामने आते हैँ - ' ब्रह्म ' और ' चर्य ' । इन दो शब्दोँ से मिलकर एक ' ब्रह्मचर्य ' शब्द बना है ।
अधिक पढ़ेँ >>>
पाइथेगोरस कहता है -
No man is free , who cannot command himself.
जो व्यक्ति अपने आप पर नियत्रण नहीँ कर सकता , वह कभी भी स्वतंत्र (ब्रह्मचारी) नहीँ हो सकता ।
अत: हम कह सकते हैँ कि वासना को ।
| यंत्र विवरण : | |
|---|---|
| आई॰ पी॰ पता : | 216.73.216.161 |
| ब्राउज़र छवि : | ![]() |
| ऑपरेटिँग सिस्टम विवरण : | Mozilla/5.0 AppleWebKit/537.36 (KHTML, like Gecko; compatible; ClaudeBot/1.0; +claudebot@anthropic.com) |
| आपका देश : | ![]() |
| समय तथा तिथि : | 2026-02-04 09:00:57 |
| फिडबैक | उपयोग की शर्तेँ |
| © 2018 spiritual | |