जब ब्रह्म ने सर्व रचना करके सभी जीवोँ को कर्मदण्ड भोगने के लिए नियम बनाया । लोग दुखी रहने लगे । तो जीवोँ ने किसी ने चारोँ वेदोँ को कंठस्थ किया , कोई उग्र तप करने लगा . यज्ञ , ध्यान , समाधि आदि क्रियाएँ किया , फिर भी परमात्मा नहीँ दर्शन दिये । फिर पुर्ण ब्रह्म कबीर साहेब अपने सतलोग से जोगजीत का रूप बनाकर काललोक मेँ आये । कबीर साहेब लोगोँ को नाम उपदेश के देकर भक्ति की रास्ता बता रहे थे इतने मेँ काल आ गया और साहेब पर हमला बोला , साहेब अपने शक्ति से उसे मुर्छित कर दिया । फिर कुछ समय के बाद होश आया और चरणोँ मेँ गिर गया । और कहा आप कौन हो ? तथा किसलिए आए हो ? तब साहेब बोले मैँ कुछ आत्माएं भक्ति करके अपने निज घर सतलोक मेँ वापिस जाना चाहती हैँ । उसे आपका भेद बताना चाहता हुँ कि तुम काल जो मन मेँ हैँ , जो 1 लाख रोज खात तथा 1.25 लाख उत्पन्न करता जो भगवान बना है । ब्रह्मा , विष्णु तथा महेश एवं इनकी पत्नियाँ सरस्वती , लक्ष्मी तथा पार्वति काल के पुत्र तथा पुतोह है । काल के पत्नी माँ दुर्गा जी है । इन सब को पुजना व्यर्थ है । तो काल : बोला अगर आप सभी को लेकर जायेगे तो मैँ भुखा मर जाऊँगा । आपसे प्रार्थना है कि आप तीन युग मेँ कम जीवोँ को भक्ति मार्ग बताये तथा कलयुग मेँ ज्यादा से ज्याद जीवोँ को ले जा सकते है। जब आप कलयुग मेँ आयेगेँ तो सभी जीवोँ मांस , मच्छली , अंडा , पिज्जा , बीड़ी , सिगरेट , आदि । ज्याद तो कलयुग मेँ समाज को खत्म करनेवाले कामुकता की अधिकता रहेगा । तथा अनेक प्रकार के पंथ जो आपके पंथ से मिलते जुलते रहेगे को जीवात्माओँ को भ्रम मेँ डाल दुँगा । तब बोले साहेब कि जो जीव कलयुग
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