समाधि का अर्थ :
काम , सेवा , अर्चना , पूजा , भक्ति ,जीना-मरना सब कुछ परमात्मा के लिए होना या करना ।
जब ध्यान परिपक्व होता तब चित्त से ध्येय का द्वैत और तत्संबंधी वृत्ति का भान चला जाता है । ध्यान मेँ ध्येयकार वृत्ति का प्रवाह समाप्त हो जाता है तब समाधि प्राप्त होती ।
समाधि के लिए योग के सभी नियमोँ का कराई से पालन करना चाहिए ।
आप रात को सोने से पहले 10 मिनट आखेँ बंद करके शरीर को शिथिल कर दीजिए ।फिर आप ध्यान करेँ कि आज क्या अच्छा किया ओर क्या बुरा । कहाँ झूठ बोला , आदि । इन पर संकल्प करेँ कि जो अनुचित हुआ वह कल नहीँ होने का प्रयास करना चाहिए । इससे आपको दुनियाँ को देखकर आश्चर्य करगेँ ।
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